The Biggest Problem



Muslims are not happy

They’re not happy inGaza
They're not happy in Egypt
They're not happy in Libya
They're not happy in Morocco
They're not happy in Iran
They're not happy in Iraq
They're not happy in Yemen
They're not happy in Afghanistan
They're not happy in Pakistan
They're not happy in Syria
They're not happy in Lebanon

So, where are they happy? 

They're happy in Australia
They're happy in England
They're happy in France
They're happy in Italy
They're happy in Germany
They're happy in Sweden
They're happy in the USA & Canada
They're happy in Norway & India
They're happy in almost every country that is not Islamic! And who
do they blame? Not Islam... Not their leadership... Not themselves...
THEY BLAME THE COUNTRIES THEY ARE HAPPY IN!! And they want
to change the countries they're happy in, to be like the countries they
came from where they were unhappy.

Try to find logic in that ! JeffFox worthy on Muslims:

1. If you refine hero in for a living, but you have a moral objection
toliquor... You are a Muslim
2. If you own a $3,000 machine gun and $5,000 rocketlauncher, but
you can't afford shoes... You are a Muslim
3. If you have more wives than teeth... You are a Muslim
4. If you think vests come in two styles: bullet-proof and
suicide...You are a Muslim
5. If you can't think of anyone you haven't declared Jihad
against...You are a Muslim
6. If you consider television dangerous, but routinely carry explosives
in your clothing... You are a Muslim
7. If you were amazed to discover that cell phones have uses other
than setting off roadside bombs... You are a Muslim
8. If you have nothing against women and think every man should own
at least four... You are a Muslim
9.If you find this offensive or racist and don't forward it... You are a
Muslim!! --------------------

Buddhists living with Hindus = NoProblem
Hindus living with Christians = NoProblem
Christians living with Shintos = NoProblem
Shintos living with Confucians = NoProblem
Confusians living with Baha'is = NoProblem
Baha'is living with Jews = NoProblem
Jews living with Atheists = NoProblem
Atheists living with Buddhists = NoProblem
Buddhists living with Sikhs = NoProblem
Sikhs living with Hindus = NoProblem
Hindus living with Baha'is = NoProblem
Baha'is living with Christians = NoProblem
Christians living with Jews = NoProblem
Jews living with Buddhists = NoProblem
Buddhists living with Shintos = NoProblem
Shintos living with Atheists = NoProblem
Atheists living with Confucians = NoProblem
Confusians living with Hindus = NoProblem
Muslims living with Hindus = Problem
Muslims living with Buddhists = Problem
Muslims living with Christians = Problem
Muslims living with Jews = Problem
Muslims living with Sikhs = Problem
Muslims living with Baha'is = Problem.
Muslims living with Shintos = Problem
Muslims living with Atheists= Problem
MUSLIMS LIVING WITH MUSLIMS =BIG PROBLEM.

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QUOTES OF SWAMI VIVEKANAND ON ISLAM



"... Islam makes its followers all equal — so, that, you see, is the peculiar excellence of Mohammedanism. In many places in the Koran you find very sensual ideas of life. Never mind. What Mohammedanism comes to preach to the world is this practical brotherhood of all belonging to their faith. That is the essential part of the Mohammedan religion; and all the other ideas about heaven and of life etc.. are not Mohammedanism. They are accretions. ...." - SV

"... I am firmly persuaded that without the help of practical Islam, theories of Vedantism, however fine and wonderful they may be, are entirely valueless to the vast mass of mankind. ..." - SV

"... For our own motherland a junction of the two great systems, Hinduism and Islam — Vedanta brain and Islam body — is the only hope. I see in my mind's eye the future perfect India rising out of this chaos and strife, glorious and invincible , with Vedanta brain and Islam body. ..." - SV

"... Mohammed by his life showed that amongst Mohammedans there should be perfect equality and brotherhood. There was no question of race, caste, creed, colour, or sex. The Sultan of Turkey may buy a Negro from the mart of Africa, and bring him in chains to Turkey; but should he become a Mohammedan and have sufficient merit and abilities, he might even marry the daughter of the Sultan. Compare this with the way in which the Negroes and the American Indians are treated in this country! And what do Hindus do? If one of your missionaries chance to touch the food of an orthodox person, he would throw it away. Notwithstanding our grand philosophy, you note our weakness in practice; but there You see the greatness of the Mohammedan beyond other races, showing itself in equality, perfect equality regardless of race or color. ..."

"... Mohammed— the Messenger of equality. You ask, "What good can there be in his religion?" If there was no good, how could it live? The good alone lives, that alone survives. ..." - SV

"... Mohammed was the Prophet of equality, of the brotherhood of man, the brotherhood of all Mussulmans. ..." -SV

"... We want to lead mankind to the place where there is neither the Vedas, nor the Bible, nor the Koran; yet this has to be done by harmonizing the Vedas, the Bible and the Koran. ..." - SV

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भारत माँ हुई थी लज्जित ,जब कश्मीरी हिंदुओं का हुआ था निर्वासन



१९ जनवरी १९९० – ये वही काली तारीख है जब लाखों कश्मीरी हिंदुओं को अपनी धरती, अपना घर हमेशा के लिए छोड़ कर अपने ही देश में शरणार्थी होना पड़ा। वे आज भी शरणार्थी हैं | उन्हें वहाँ से भागने के लिए मजबूर करने वाले भी कहने को भारत के ही नागरिक थे, और आज भी हैं। उन कश्मीरी इस्लामिक आतंकवादियों को वोट डालने का अधिकार भी है, पर इन हिंदू शरणार्थियों को वो भी नहीं।


 १९९० के आते आते फारूख अब्दुल्ला की सरकार आत्म-समर्पण कर चुकी थी। हिजबुल मुजाहिदीन ने ४ जनवरी १९९० को प्रेस नोट जारी किया जिसे कश्मीर के उर्दू समाचारपत्रों आफताब और अल सफा ने छापा।  प्रेस नोट में हिंदुओं को कश्मीर छोड़ कर जाने का आदेश दिया गया था। कश्मीरी हिंदुओं की खुले आम हत्याएँ शुरू हो गयी। कश्मीर की मस्जिदों के लाउडस्पीकर जो अब तक केवल अल्लाह-ओ-अकबर के स्वर छेड़ते थे, अब भारत की ही धरती पर हिंदुओं को चीख चीख कहने लगे कि कश्मीर छोड़ कर चले जाओ और अपनी बहू बेटियाँ हमारे लिए छोड़ जाओ। "कश्मीर में रहना है तो अल्लाह-अकबर कहना है", "असि गाची पाकिस्तान, बताओ रोअस ते बतानेव सन" (हमें पाकिस्तान चाहिए, हिंदू स्त्रियों के साथ, लेकिन पुरुष नहीं"), ये नारे मस्जिदों से लगाये जाने वाले कुछ नारों में से थे !!


दीवारों पर पोस्टर लगे हुए थे कि सभी कश्मीर में इस्लामी वेश भूषा पहनें, सिनेमा पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया।  कश्मीरी हिंदुओं की दुकानें, मकान और व्यापारिक प्रतिष्ठान चिन्हित कर दिए गए।  यहाँ तक कि लोगों की घड़ियों का समय भी भारतीय समय से बदल कर पाकिस्तानी समय पर करने को उन्हें विवश किया गया।  २४ घंटे में कश्मीर छोड़ दो या फिर मारे जाओ – काफिरों को क़त्ल करो का सन्देश कश्मीर में गूँज रहा था। इस्लामिक दमन का एक वीभत्स चेहरा जिसे भारत सदियों तक झेलने के बाद भी मिल-जुल कर रहने के लिए भुला चुका था, वो एक बार फिर अपने सामने था।


आज कश्मीर घाटी में हिंदू नहीं हैं। उनके शरणार्थी शिविर जम्मू और दिल्ली में आज भी हैं। २२ साल से वे वहाँ जीने को विवश हैं। कश्मीरी पंडितों की संख्या ३ लाख से ७ लाख के बीच मानी जाती है, जो भागने पर विवश हुए।  एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो गयी। कभी धनवान रहे ये हिंदू आज सामान्य आवश्यकताओं के मोहताज हैं । उनके मन में आज भी उस दिन की प्रतीक्षा है जब वे अपनी धरती पर वापस जा पाएंगे।  उन्हें भगाने वाले गिलानी जैसे लोग आज भी जब चाहे दिल्ली आके कश्मीर पर भाषण देकर जाते हैं और उनके साथ अरूंधती रॉय जैसे भारत के तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवी शान से बैठते हैं।


कश्यप ऋषि की धरती, भगवान शंकर की भूमि कश्मीर जहाँ कभी पांडवों की २८ पीढ़ियों ने राज्य किया था, वो कश्मीर जिसे आज भी भारत माँ का मुकुट कहा जाता है, वहाँ भारत के झंडा लेकर जाने पर सांसदों को पुलिस पकड़ लेती है और आम लोगों पर डंडे बरसाती है। ५०० साल पहले तक भी यही कश्मीर अपनी शिक्षा के लिए जाना जाता था। औरंगजेब का बड़ा भाई दारा शिकोह कश्मीर विश्वविद्यालय में संस्कृत पढ़ने गया था। बाद में उसे औरंगजेब ने इस्लाम से निष्कासित करके भरे दरबार में उसे क़त्ल किया था। भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग और प्रतिनिधि रहे कश्मीर को आज अपना कहने में भी सेना की सहायता लेनी पड़ती है। “हिंदू घटा तो भारत बंटा” के 'तर्क’ की कोई काट उपलब्ध नहीं है। कश्मीर उसी का एक उदाहरण मात्र है।

मुस्लिम वोटों की भूखी तथाकथित सेकुलर पार्टियों और हिंदू संगठनों को पानी पी पी कर कोसने वाले मिशनरी स्कूलों से निकले अंग्रेजीदां पत्रकारों और समाचार चैनलों को उनकी याद भी नहीं आती। गुजरात दंगों में मरे साढ़े सात सौ मुस्लिमों के लिए जीनोसाईड जैसे शब्दों का प्रयोग करने वाले सेकुलर चिंतकों को अल्लाह के नाम पर क़त्ल किए गए दसियों हज़ार कश्मीरी हिंदुओं का ध्यान स्वप्न में भी नहीं आता। सरकार कहती है कि कश्मीरी हिंदू "स्वेच्छा से" कश्मीर छोड़ कर भागे। इस घटना को जनस्मृति से विस्मृत होने देने का षड़यंत्र भी रचा गया है। आज की पीढ़ी में कितने लोग उन विस्थापितों के दुःख को जानते हैं जो आज भी विस्थापित हैं। भोगने वाले भोग रहे हैं ।  जो जानते हैं, दुःख से उनकी छाती फटती है, और आँखें याद करके आंसुओं के समंदर में डूब जाती हैं और सर लज्जा से झुक जाता है।  रामायण की देवी सीता को शरण देने वाली भारत की धरती से उसके अपने पुत्रों को भागना पड़ा। कवि हरि ओम पवार ने इस दशा का वर्णन करते हुए जो लिखा, वही प्रत्येक जानकार की मनोदशा का प्रतिबिम्ब है -

 "मन करता है फूल चढा दूँ लोकतंत्र की अर्थी पर,
 भारत के बेटे शरणार्थी हो गए अपनी धरती पर"।

 Post By : - IBTL


 सिर्फ इक प्रश्न : - कोई भी सेकुलर कुत्ता इस मुद्दे पर कभी भी क्यों नहीं भोकता ????

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