कितने सारे भगवान ? - How many Gods?




ओम् नमो भगवते वासुदेवायः

कितने सारे भगवान ? यह लोग हमेशा कहते है | कुछ लोग जो या तो अज्ञानी हैं या जिनकी मंशा सनातन धर्मं के प्रति अच्छी नहीं है, इस वाक्य का अत्यधिक प्रयोग करते दिख जायेंगे |

उपरी लोकों में देवताओं का वास है जिसे मुर्ख लोग कई भगवान कहकर पुकारते हैं | देवता मनुष्य से ज्यादा उन्नत प्राणी हैं | इस ब्रम्हांड का निर्माण करते समय श्री ब्रम्हा ने १४ लोकों में जीवन की स्थापना की और विभिन्न प्रकार के प्राणियों के निर्माण किया | देवता उन प्राणियों में सबसे उत्तम हैं | देवताओं के अलावा भी कई और उन्नत प्राणी उपरी लोकों में हैं जैसे यक्ष, गन्धर्व इत्यादि | प्राणियों की यह विविधता इस पृथ्वी पर भी स्पस्ट देखा जा सकती है | लाखों प्रकार के जीव इस पृथ्वी पर निवास करते हैं |

श्रीमद भगवत गीता में परमात्मा श्री कृष्ण ने देवताओ के सृजन एवं मनुष्यों के साथ उनके सामंजस्य का स्पस्ट वर्णन किया है |

कृपया निम्न श्लोकों कों देखे :
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Ch3:Sh10
सहयज्ञाः प्रजाः सृष्टा पुरोवाचप्रजापतिः ।
अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक्‌ ॥

भावार्थ : प्रजापति ब्रह्मा ने कल्प के आदि में यज्ञ सहित प्रजाओं को रचकर उनसे कहा कि तुम लोग इस यज्ञ द्वारा वृद्धि को प्राप्त होओ और यह यज्ञ तुम लोगों को इच्छित भोग प्रदान करने वाला हो॥10॥

Ch3:Sh11
देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः ।
परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ॥

भावार्थ : तुम लोग इस यज्ञ द्वारा देवताओं को उन्नत करो और वे देवता तुम लोगों को उन्नत करें। इस प्रकार निःस्वार्थ भाव से एक-दूसरे को उन्नत करते हुए तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे॥11॥

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ऊपर के श्लोकों से हम निम्न तथ्यों कों अलग कर सकते हैं :
१. श्री ब्रम्हा ने देवता समेत विभिन्न प्राणियों का सृजन ब्रम्हांड के निर्माण के समय किया
२. मनुष्य देवताओं का पूजन करते हैं और देवता मनुष्य एवं दूसरे जीवों के पालन करते हैं |

ऊपर के श्लोकों में स्पस्ट तौर पर लिखा है कि मनुष्य देवतों का पूजन कर उन्हें प्रसन्न करें और देवतागण मनुष्यों के पालन करें | मनुष्य एवं देवता दोनों एक दूसरे कों उन्नत करें | इस प्रकार से देवताओं एवं मनुष्यों का धर्म निर्धारित किया गया है|

इसको थोडा और स्पष्टता के साथ समझने के लिए एक्स उदहारण लेते हैं | हम देखतें हैं कि सभी बड़े देशों में प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति देश का प्रमुख होता है | प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति के साथ या उसके अधीन कई अन्य मंत्री होते हैं | देश की केन्द्रीय सत्ता फिर छोटे छोटे राज्यों में विभाजित होती है | हर एक राज्य का फिर अपना मुख्य मंत्री या राज्यपाल होता है जो उस राज्य का प्रमुख होता है | इतना ही नहीं राज्य पुनः जिलों या काउंटी में विभाजित होते हैं और हर एक जिले का एक प्रमुख होता है | इस प्रकार सत्ता का पूरा कार्य व्यवस्थित होता है |

मान लें किसी कों आय कर जमा करना है तो वह नजदीक के किसी आयकर ऑफिस में जाकर अपना आयकर जमा करता है | इसी प्रकार किसी अन्य कार्य के लिए भी हम किसी स्थानीय सरकारी कार्यालय में ही जाता हैं, प्रधान मंत्री के पास नहीं जाता | बल्कि बड़े से बड़े कार्य भी हम इसी प्रकार की किसी सरकारी कार्यालय में ही संपन्न होते हैं | प्रधान मंत्री अपने मंत्रियों के साथ देश की उच्च नीति निर्धारण का कार्य करता हैं | मंत्री परिषद की सारी नीतियां फिर ऊपर से नीचे सभी सरकारी निकायों द्वारा लागु की जाती हैं |

यह व्यवस्था सिर्फ सरकारी कार्यों ही नहीं बल्कि हर एक प्रकार कि संस्थायों जैसे बैंक, न्याय पद्धति, कंपनियों आदि में लागु होती हैं | बल्कि इस प्रकार की व्यवस्था सबसे उत्तम है और सार्वभौम भी |

ईश्वर का विधान भी ठीक इस प्रकार से कार्य करता है | ईश्वर ने देवताओं कों इस ब्रम्हांड के सारे कार्यों कों सुचारू रूप से चलाने के लिए निर्मित किया है | देवता अपने नीचे अन्य उच्च प्राणियों की सहायता से परमात्मा श्री विष्णु द्वारा निर्धारित दैविक नियमों कों लागु करते हैं | इन्द्र देव इन देवताओं के राजा हैं |

श्री शिव शंकर, श्री ब्रम्हा एवं श्री विष्णु उसी परम ब्रम्ह के तीन रूप हैं जो इस ब्रम्हांड के तीन प्रमुख कार्यों निर्माण, पालन एवं विनाश का निर्धारण करते हैं | इस प्रकार ब्रम्हांड का पूरा कार्य संपन्न होता है |

मनुष्य देवताओं की पूजा करते हैं और देवता मनुष्यों एवं अन्य जीव कों प्रथ्वी पर जीवन से सम्बंधित सभी साधनों कों उपलब्ध कराते हैं | इस प्रकार देवता श्री विष्णु द्वारा निर्धारित नियमों कों लागु करते हैं | मनुष्यों की समृधि देवताओं का यथा संभव पूजन करके प्राप्त होता है | देवताओं और मनुष्य के इस सम्बन्ध में बाधा होने से पृथ्वी पर समस्याओं का आगमन होता है | मनुष्यों कों हमेशा देवताओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए |

मुझे उम्मीद है इस सत्य कों जानने के बाद किसी के मन में किसी प्रकार कि शंका नहीं होगी | इस विषय पर और भी अधिक विवरण मैं आने वाले विवेचन में दूँगा |
परमात्मा श्री कृष्ण आपका मार्गदर्शन करें |
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(English)
On namo bhagavate vasudevayah"

How many Gods? Many of us might be coming through phrase like this. Rather this is one of the propaganda used against Hinduism by those who are either ignorant or have ill intensions.

So called multiple Gods are actually Devatas(Demigods or deities). They are wrongly referred to as gods by the Ignorant western translators. These deities were one of those living beings created by Lord Bramha at the time of creation. Devatas are the higher beings who resides in higher planets called Devalokas(Heaven). There are not just Devatas(deities) but other higher beings , to name a few are Gandharvas, Yakshas etc. All of them resides in their respective Lokas (higher planets). The number of such planets where life exists is supposed to be 14. The references of the same can be found in Vedas and Puranas. Shrimad Bhagvat Gita gives a brief description about deities and their significance for human.

For this post I would like to put following references:
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Ch3:Sh10
saha-yajnah prajah srstva purovaca prajapatih
anena prasavisyadhvamesa vo ’stv ista-kama-dhuk

"In the begining , the creator Brahma created being(including deities) with the Yajna(Sacrifice) and said "By Yajna(Sacrifice) you propagate, and grow , let Yajna(Sacrifice) be your wish-fulfilling cow of plenty"

Ch3:Sh11
Te deva bhavayantu vah devan bhavayatanena
parasparam bhavayantahsreyah param avapsyatha

"By this Yajna(religious sacrifice), you please demigods and then those demigods will nurture you. In this way, supporting each way, you shall obtain supreme good"

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From above two shlokas we can summarize following important facts.
1. Lord Bramha created all living beings at the time of creation including Devatas.
2. Deities are responsible for nurturing human and other living beings.

It is very clear from the above that Human should please Devatas(demigods) by worshiping in different way. Devatas in turn will nurture human.

To understand in better way we can draw a parallel with a Governing system. There is a prime minister/President who is the head. He has many ministers under him. Centeral Govt/Federate State is further divided into states/provinces. Each state has one chief minister/Governor who is the head of that state. The states are further divided into smaller governing bodies like districts /counties etc. There are officials at local levels who represent state/center government. This way whole governance is done.

If somebody wants to submit Income tax he is not going to Prime minister for it, rather he goes to local Income tax office to pay the Income tax.

This system works not only in Governing bodies but in almost all types of organizations, like banks, Institutes, Companies etc. Rather hierarchy is the best way to accomplish all complex tasks.

The ministery of God works in same way. Devatas(deities) are the ministry of Lord. The task of all deities is divided. Indra is the king of Devatas(deities). Devatas perform their tasks to nurture human and other living beings as per the divine law Made by Lord Shri Vishnu. Lord Bramha and Lord Shiva and Lord Vishnu manifested from same Parmatma(Lord) to perform the three major tasks of Universe, the creation, maintenance and destruction.

Human worship deities and deities in turn nurture human. This co-relation and coexistence is the best possible way for prosperous existence of human on earth. Deviation from this co-relation is invitation to the troubles as this disturbs the balance between Devatas and Human.

I hope this note will help devotees to remove confusion related with Devatas. All such talks of many gods are due to ignorance or propagated for ill intentions. God has his full ministry and all tasks in this universe is well managed by divine laws.


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