अपच - बेल के प्रयोग से पेट के रोग का निवारण

पेट के रोग रोगों की जड़ है पेट खराब हुआ की बीमारियों ने घेर लिया आयुर्वेद में इसीलिए रोगों का उपचार उदर को निरोग व स्वस्थ रखने से होता है। बेल का सही मात्रा में प्रयोग। कैसे उदर रोगों को निकालकर बाहर करता है प्रस्तुत है रोगों के संदर्भ व उनके उपचार प्रयोग की विधि ~

अपच - बेल के प्रयोग से पेट के रोग का निवारण

अपच 

अपच का जन्म कई कारणों से होता है ज्यादातर यह रोग भोजन करने के बाद सो जाने चिंता ने दे ने गड़बड़ी जितना एक तनाव के कारण होता है।

भोजन करने के बाद पानी पीने या बिना अच्छी तरह से चबाएं खाना खाने तथा परिश्रम करने से भी अपच का रोग फिर लेता है।

लक्षण

अपच की हालत में पेट में दर्द शुरू हो जाता है वायु बन जाती है जो डकार के रूप में मुंह से निकलती रहती है जी मिचलाता है तथा कई बार तो काई आते ही उल्टी हो जाती है भूख लगना बंद हो जाती है पेट में जलन तथा अम्ल पित्त बनने रखता है।

उपचार- 
बेल के 25 ग्राम गूदे में 4 दाने कालीमिर्च जरा सिंह तथा जरा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें बेल का शरबत पीने से अपच की शिकायत दूर हो जाती है।

बेल के पत्ते की चटनी बनाकर भोजन के साथ सेवन करें।

बेल का मुरब्बा खाकर ऊपर से हिंग्वाष्टक चूर्ण खाएं।

एक गिलास पानी में 4 चम्मच बेल का चूर्ण एक चुटकी खाने का सोडा एक चम्मच अजवायन का चूर्ण जरा सा काला नमक तथा एक रत्ती हींग डालकर सेवन करें।