राशियों के चरित्र आदि भेद, ग्रहों का स्वभाव तथा सात वारों में किए जाने योग्य प्रशस्त कार्य

तुला, कर्क, मेष, और मकर - यह चर राशियां हैं, इनमें यात्रा आदि चर कार्य करने चाहिए। सिंह, वृष, कुंभ और वृश्चिक स्थिर राशियाँ हैं। इनमें स्थिर कार्य करने चाहिए कन्या धनु मीन एवं मिथुन राशि द्विस्वभाव की होती हैं। विद्वान व्यक्ति को इन राशियों में द्विस्वभाव  से युक्त कार्य करना चाहिए।  यात्रा चर लग्न में तथा ग्रह प्रवेश ग्रह प्रवेश आदि का कार्य स्थिर लग्न में करना चाहिए।  देवताओं की स्थापना और व्यवहारिक कार्य वैवाहिक संस्कारों को द्विस्वभाव के लग्न में करना श्रेयस्कर हैं।


प्रतिपदा षष्टी तथा एकादशी तिथियां नंदा मानी जाती हैं। द्वितीय सप्तमी और द्वादशी तिथियां भद्रा कहीं जाए गई हैं। तृतीया अष्टमी और त्रयोदशी तिथियां जया कहीं गई है। चतुर्थी नवमी तथा चतुर्दर्शी तिथियां रिक्ता तिथि है, यह शुभ कार्य के लिए वर्जित है।


सौम्य स्वभाव वाला बुध ग्रह चर स्वभाव है। गुरु क्षिप्र, शुक्र मृदु और रवि ध्रुव स्वभाव का है। शनि दारुण, मंगल उग्र तथा चंद्रमा को सम स्वभाव का जानना चाहिए।


शेर और शिप्रा स्वभाव वाले अर्थात बुद्ध एवं बृहस्पति वार में यात्रा करनी चाहिए तथा मृत और ध्रुव अशोक भावसार स्वभाव से संयुक्त शुक्र अथवा रविवार को गृहप्रवेश आदि का कार्य करना चाहिए दारू और उग्र स्वभाव वाले शनि तथा मंगलवार को विजय प्राप्त करने की अभिलाषा से क्षत्रियादि वीरों को युद्ध के लिए प्रस्थान करना चाहिए।


ग्रहों का स्वभाव तथा सात वारों में किए जाने योग्य प्रशस्त कार्य