अनंगत्रयोदशी - चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी 'अनंगत्रयोदशी' कहलाती है। इस दिन व्रत करने से दांपत्य-प्रेम में वृद्धि होती है तथा पति-पुत्रपुत्रादि का अखंड सुख प्राप्त होता है।

भविष्य पुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को कामदेव, रति और वसंत की पूजा करके दंपति सुख-सौभाग्य तथा पुत्र की प्राप्ति करते हैं-

चैत्रोत्सवे सकललोकमनोनिवासे कामं त्रयोदशतिथौ च वसंतयुक्तम
पत्नया सहाच्यपुरुषप्रवरोथ योषित्सौभाग्यरूपसुतसौख्ययुतः सदा स्यात्!

त्रयोदशी भगवान शंकर जी की भी प्रिय तिथि है


यह व्रत इस तिथि को आरंभ कर वर्षभर प्रत्येक त्रयोदशी को किया जाता है। इस व्रत को स्त्री-पुरुष दोनों ही करते हैं। त्रयोदशी भगवान शंकरजी की भी प्रिय तिथि है और भगवान शंकर दांपत्य प्रेम के आदर्श माने जाते हैं। अतः इस दिन व्रत करने से दांपत्य-प्रेम की अभिवृद्धि होती है।

इस दिन  प्रातः काल अशोक की दातौन  कर स्नान करना चाहिए तथा  व्रत का संकल्प लेना चाहिए। एक उत्तम कपड़े पर मदनदेवकी मोहक मूर्ति अंकित करके गंध पुष्पादि से उसका पूजन करना चाहिए। पूजन में अशोक के पत्र और पुष्प चढ़ाने का विशेष विधान है। उसके बाद घी से बनाए हुए मोदकों का नैवेद्य निम्नलिखित मंत्र से लगाना चाहिए-

नमो रामाय कामाय कामदेवस्य मूर्तये।
ब्रह्मविष्णुशिवेंद्राणां नमः क्षेमकराय वै।!

इसके बाद फलाहार या उपवास करके रात्रि-जागरण करना चाहिए तथा दूसरे दिन पारण करना चाहिए। ब्राह्मण-भोजन कराकर अनंग-प्रतिमा या चित्र का पूजा सामग्री सहित दान करना चाहिए। महाराष्ट्र तथा बंगाल में इस व्रत का विशेष प्रचलन है।